किस देश में लिखित संविधान नहीं है?|kis desh mein likhit samvidhan nhi hai

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kis desh mein likhit samvidhan nhi hai? क्या आप यह जानना चाहते हैं कि किस देश में लिखित संविधान नहीं है तो हमारे इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़िएगा।

आप में से बहुत लोगों ने कई websites पर यह सवाल पूछा है कि किन देशों का लिखित संविधान नहीं है या किन देशों का एक “uncodified constitution” है, लिखित संविधान का मतलब क्या होता है।

इसलिए हमने आपके लिए आर्टिकल लिखा है जिसमें हम आपको यह बताएंगे कि वह कौन से देश हैं जिनका संविधान लिखित में नहीं है, लिखित संविधान क्या होता है, इसके क्या फायदे होते हैं, आदि चीजों के बारे में हम आपको पूरी जानकारी देंगे, इसलिए इस आर्टिकल को ध्यान से  पढ़िएगा।

किन देशों का संविधान लिखित में नही है?

kis desh mein likhit samvidhan nhi hai

दोस्तों सबसे पहले हम आपके सवाल का जवाब देना चाहेंगे कि वह कौन से देश हैं जिनका संविधान लिखित में नहीं है, ऐसे कुल पांच देश है जिनका संविधान लिखित में नहीं है और वह Israel, New Zealand, Saudi Arabia, United Kingdom, और Canada हैं। 

अब आपको पता चल गया होगा कि किस देश में लिखित संविधान है।

अब जबकि हमने आपको उस सवाल का जवाब दे दिया है जिसके लिए आप बेसबरी से इंतजार कर रहे थे, अब हम आपको लिखित और uncodified संविधान के बारे में बताते हैं।

आगे हम आपको लिखित और अलिखित संविधान के बारे में बताएंगे लेकिन उससे पहले हम आपको संविधान के बारे में बताना चाहेंगे।

संविधान क्या होता है?

संविधान legislation और प्रिंसिपल्स का एक ढांचा होता है जो किसी देश या राज्य को govern करता है। यह एक देश के सामान्य laws या नियमों का document होता है, जिसका सारे नागरिक पालन करते हैं। 

अब हम आपको बताते हैं कि लिखित संविधान क्या है।

लिखित संविधान क्या होता है (likhit samvidhan kya hai)?

एक लिखित या कोडिफाइड संविधान एक ऐसा संविधान होता है जो केवल एक ही document में लिखा गया होता है, जो स्टेट के constitutional लॉ का एक ही सोर्स होता है। इस तरह के संविधान में और कोई सोर्स नहीं होता है। केवल पांच देशों को छोड़कर all likhit samvidhan वाले देश हैं। 

अब आपको समझ आ गया होगा कि likhit samvidhan kise kahate hain या likhit samvidhan ka kya arth hai.

likhit samvidhan ki avdharna सबसे पहले कहां पर हुई थी?

लिखित संविधान का जन्म या  अवधारणा सबसे पहले France में शुरू हुई थी।

क्या लिखित संविधान होना जरूरी होता है?

अगर किसी देश का संविधान लिखित में है तो parliament किसी भी law को नहीं बना सकेगा या फिर नहीं बिगाड़ सकेगा, क्योंकि वहां पर संविधान मौजूद होगा और वहां पर किसी बिल या फिर राइट की मदद से ही उस पर कोई एक्शन लिया जाएगा। क्योंकि एक लिखित संविधान को पार्लमेंट से ज्यादा बड़ा माना जाता है।

किन देशों के पास एक लिखित संविधान है? 

किन देशों के पास एक लिखित संविधान है

जैसा कि हमने आपको बताया था कि केवल पांच ही ऐसे देश हैं जिनका संविधान लिखित में नहीं है। उनके अलावा बाकी सब देशों का संविधान लिखित में है। अब आपको समझ आ गया होगा कि likhit samvidhan wale desh कौन से हैं।

लिखित संविधान के क्या फायदे होते हैं?

लिखित संविधान का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि उसकी वजह से देश में ‘elective dictatorship’ नहीं हो सकती है। 

मतलब कि सरकार अपने ताकतों का इस्तेमाल parliament के फैसलों को बदलने के लिए नहीं कर सकती है। 

एक लिखित संविधान की वजह से सरकार संविधान को नहीं बदल सकती है, और उसे तोड़ मरोड़ कर अपने फायदे के लिए भी इस्तेमाल नहीं कर सकती। 

लिखित संविधान का एक और फायदा यह है कि उसकी वजह से सरकार अपनी executive ताकतों का इस्तेमाल rules को मिटाने के लिए नहीं कर सकती।

हमारे आर्टिकल के इस भाग में हमने आपको likhit samvidhan ke gun या likhit samvidhan ki visheshta बताई।

लिखित संविधान के क्या नुकसान होते हैं?

लिखित संविधान के क्या नुकसान होते हैं

लिखित संविधान के कई फायदे हैं लेकिन उसके नुकसान भी हैं, यह है उसकी कुछ खामियां।

1. एक लिखित संविधान पत्थर की एक मूरत की तरह होता है। उसमें नई चीजों को include करना नामुमकिन होता है,  बहुत से जानकारों का यह मानना है कि लिखित संविधान rigid documents की तरह होते हैं जो देश की सरकार को चलाने वाले सिस्टम में बहुत ही अंदर गड़े होते हैं। 

इस वजह से इस तरह के संविधान में नई चीजों को जोड़ना बहुत ही ज्यादा कठिन होता है।

2. इस तरह के संविधान को बदलना बहुत ही ज्यादा कठिन होता है। जैसा हमने आपको बताया कि एक लिखित संविधान बहुत ही अंदर entrenched होता है, इसी वजह से इसे बदलना बहुत ज्यादा कठिन होता है। 

इस तरह के संविधान को बदलने के लिए बहुत से तरीकों का इस्तेमाल करना पड़ता है जैसे कि referendums और वोट्स, संविधान में क्या बदलाव करना है उसी तरीके से वोटिंग की जा सकती है।

एक लिखित संविधान को बदलने में भी बहुत ज्यादा समय और पैसा लगता है। और साथ ही में इसे बदलने के लिए बहुत ही ज्यादा बातचीत करनी पड़ती है, जिसकी  वजह से यह काम और भी ज्यादा कठिन हो जाता है।

3. इसमें कुछ outdated aspects होते हैं। लिखित संविधान को एक निरधारित समय पर लिखा जाता है, इसी वजह से इनमें सारी चीजों को डालना बहुत ज्यादा कठिन होता है। 

इसलिए इसके कुछ aspects समय के साथ outdate हो जाते हैं और   ऐसे संविधान का इस्तेमाल अपने देश को गाइड करने के लिए बहुत ही ज्यादा कठिन हो सकता है, क्योंकि इसमें कुछ पुराने aspects होते हैं जिनका इस समय कोई काम नहीं है।

4. इस तरह के संविधान में misinterpretation हो सकती है। सारे ही लिखित संविधान ओं को इंटरप्रिटेशन के लिए इस्तेमाल किया जाता है, इसी वजह से अलग-अलग courts और judges इस संविधान को समझने में अलग-अलग approaches का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसकी वजह से इसका गलत मतलब निकाला जा सकते है। 

इसकी वजह से लोगों के मन में यह confusion पैदा हो सकती है, कि किसी लॉ या दफा का मतलब क्या है। अब आपको पता चल गया होगा कि likhit samvidhan ke dosh क्या हैं।

Uncodified या अलिखित संविधान  क्या होता है?

Uncodified या अलिखित संविधान  क्या होता है

ऐसा कोई भी संविधान जिसमें कानून या नियम किसी भी रूप में नहीं लिखें होते हैं या किसी भी किताब में उनके बारे में नहीं लिखा जाता है, लेकिन वहां पर संविधान चलता है, ऐसे संविधान को अलिखित या अनकोडिफाइड संविधान कहा जाता है।

Uncodified संविधान  एक ऐसा संविधान होता है जहां पर fundamental रूल्स ज्यादातर customs के हिसाब से, जरूरत की वजह से, और लीगल चीजों की वजह से बदल दिए जाते हैं।

इस तरह के संविधान को समझने की कोशिश judiciary, सरकार की committee या फिर लीगल experts की मदद से की जाती है।

मैग्ना कोर्टा, जिसे संविधान का सबसे पुराना  लिखित रूप कहा जाता है, यह रईसों के अधिकारों का एक चार्टर था, जिस पर इंग्लैंड के राजा ने खुद साइन किया था। 

यह 15 जून 1215 को लागू हुआ था। चार्टर ने ताज के द्वारा की गई किसी भी छेड़छाड़ से कुलीनों के अधिकारों को बचाने की कसम खाई थी। 

अंत में मैग्ना कार्टा United Kingdom के अलिखित संविधान के रूप में विकसित हुआ था।

अलिखित या uncodified संविधान के क्या फायदे होते हैं?

अलिखित संविधान के यह फायदे होते हैं।

1. इसमें समय के साथ बदला जा सकता है। हम यह बात जानते हैं कि दुनिया के किसी भी देश में निरंतरता नहीं है, हर जगह, हर समाज में राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तन बहुत ही ज्यादा तेजी से हो रहा है।

अलिखित संविधान वाले देशों को यह मौका मिलता है कि वह देश में बदलाव होने के अनुसार अपने संविधान को भी बदल सके ताकि क्रांति आने की कोई संभावना ही ना हो।

2. क्रांति आने की कोई संभावना ही नहीं होती है। जब संविधान को बनाने वाले लोग संविधान में समय के साथ जरूरी परिवर्तन करते रहते हैं, तो वहां के लोग अपने देश की सरकार से खुश रहते हैं। 

समाज में क्रांति आने की संभावना बहुत ही ज्यादा कम हो जाती है, क्योंकि जब लोग अपनी सरकार से कुछ नहीं होते तभी क्रांति आने की संभावना होती है। अलिखित संविधान ऐसे ही समय की जरूरतों के अनुसार बदल दिया जाता है।

3. इसकी वजह से देश का विकास जल्दी हो सकता है। जैसा कि हमें पता है कि नेताओं में अक्सर परिवर्तन होते रहते हैं, इस तरह के संविधान में लोगों की इच्छा अनुसार परिवर्तन किया जा सकता है। 

जिस समय में हम जी रहे हैं, लोग पिछड़े हुए विचारों को छोड़कर अब विकास की बातों को ज्यादा मानते हैं, इसलिए यह संविधान उन्हे यह मौका देता है कि वह अपने पुराने नियमों को हटाकर नए और बेहतर नियमों को बिना किसी दिक्कत के जोड़ सकते हैं।

4. आपातकालीन स्थिति में है संविधान बहुत ही ज्यादा मददगार होता है। जब देश पर कोई संकट आ जाता है तो इस तरह का संविधान बहुत ज्यादा काम आता है। 

आपातकाल की स्थिति को ध्यान में रखते हुए संविधान में जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं। लॉर्ड वॉइस ने सही कहा था “आपातकाल की स्थिति में असंवैधानिक संविधान का सामना करने के लिए, उसकी संरचनाओं को खत्म किए बिना उसे झुकाया जा सकता है और खींचा जा सकता है और जब संकट समाप्त हो जाता है तो वह एक पेड़ की तरह अपने पहले वाले रूप में वापस आ जाता है।”

अलिखित या uncodified संविधान की खामियां क्या हैं?

अगर किसी देश के पास एक लिखित संविधान नहीं है, तो इसका मतलब यह है कि वहां के देश के लोगों को भी उस संविधान को समझने में  दिक्कतें आ सकती हैं। वह क्या दिक्कते हैं, चलिए आपको बताते हैं।

1. अगर किसी देश का संविधान अलग-अलग sources से जानकारी लेता है, तो  उसकी वजह से वह ज्यादा accessible नहीं होता और लोगों को उसके बारे में काम जानकारी होती है।

2. Executive, legislative और judicial branches की ताकतों के बारे में उन्हें पूरी जानकारी नहीं होती है, जिसकी वजह से दिक्कतें आ सकती हैं, जैसे कि किसी बात को लेकर दोनो sources का जवाब अलग है, तो उस समय सरकार के इन तीनों pillars के बीच में conflict हो सकता है।

3. एक uncodified संविधान के flexible होने का मतलब यह है कि उसकी किसी टॉपिक के बहुत से मतलब हो सकते हैं। 

जैसे कि Parliament को suspend करने के लिए एक्जीक्यूटिव और ज्यूडिशियरी का अलग- अलग डिसीजन देना।

अब आपको समझ आ गया होगा कि लिखित संविधान का क्या अर्थ है।

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निष्कर्ष about kis desh mein likhit samvidhan nhi hai

दोस्तों यह बताना तो बहुत ही ज्यादा कठिन है कि लिखित संविधान बेहतर होता है या अलिखित, लेकिन हम यह कह सकते हैं कि देश के विकास के लिए जो संविधान ज्यादा अच्छा काम कर रहा है, वही उस देश के लिए एक बेहतर संविधान है।

इस आर्टिकल में हमने आपको बताया कि किन देशों के पास एक लिखित संविधान नहीं है, लिखित और अलिखित संविधान संविधान क्या होता है और इनके बारे में पूरी जानकारी दी।

उम्मीद करते हैं कि आपको यह आर्टिकल किस देश में लिखित संविधान नहीं है? या kis desh mein likhit samvidhan nhi hai पसंद आया होगा, इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें, इसे अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद!

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