Bacchon ko Hindi padhna kaise sikhayen?

Bacchon ko Hindi padhna kaise sikhayen:- दोस्तों, आज के समय जहां राष्ट्रवाद और स्थानीय भाषा का महत्व बढ़ता जा रहा है, वहीं पर मां-बाप अपने बच्चों को अंग्रेजी भाषा की तुलना में हिंदी भाषा या अपनी सांस्कृतिक भाषा सीखने पर अधिक जोर देते हैं।

यदि आप भी इसी राष्ट्रवाद की धारा में अपने आप को प्रफुल्लित करना चाहते हैं और अपने बच्चों को हिंदी पढ़ना चाहते हैं और सोच रहे हैं कि Bacchon ko Hindi padhna kaise sikhayen तो हम आज आपकी इसमें पूरी तरह से मदद करने वाले हैं।

आज हम आपको बताने वाले हैं कि Bacchon ko Hindi padhna kaise sikhayen, हिंदी पढ़ना क्यों जरूरी है, हिंदी की आवश्यकता क्या है, हिंदी क्यों महत्वपूर्ण है, हिंदी पढ़ने के लिए कौन से तरीके सही है, हिंदी पढ़ने के टिप्स कौन से हैं, इन सब के बारे में आज हम आपको विस्तार से जानकारी देंगे। अंत में आप जान पाएंगे कि बच्चों को हिंदी पढ़ना कैसे सिखाएं।

तो चलिए शुरू करते हैं-

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हिंदी भाषा की शुरुआत कब हुई?

Bacchon ko Hindi padhna kaise sikhayen जानने से पहले हम हिन्दी भाषा के बारे में जानकारी प्राप्त कर लेते है। हिंदी भाषा की शुरुआत कब हुई है यह पता लगाना तो लगभग असंभव है। क्योंकि हिंदी भाषा का जन्म संस्कृत के गर्भ से हुआ है। पढ़ने और लिखने में संस्कृत भाषा और हिंदी भाषा में कोई अंतर नहीं है। एक तरीके से संस्कृत भाषा का एक दूसरा रूप हिंदी भाषा है, और संस्कृत भाषा को प्राचीनतम भाषा के तौर पर माना जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि आज से 1,00,000 वर्ष पूर्व से भी अधिक समय से पहले हो चुका था। क्योंकि संस्कृत भाषा के जन्म को लेकर कहीं भी कोई लिखित प्रमाण नहीं है, जो यह प्रमाणित कर सके कि इस समय संस्कृत भाषा का जन्म हुआ था। लेकिन आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि सातवीं सदी के आसपास हिंदी भाषा पूर्ण रूप से अपने अस्तित्व में आ गई थी, भारत के लगभग उत्तरी छोर के आसपास की भूमि पर हिंदी भाषा की शुरुआती बोलियां बोली जाने लगी थी।

हिंदी भाषा के संदर्भ में और भी कई ऐसी भाषाएं हैं जो हिंदी भाषा से लगभग मिलती जुलती है या जिसने हिंदी भाषा में अपना मेल किया है। कई लोगों का यह मानना है कि हिंदी एक इंडो-आर्यन भाषा है जो शुद्ध वैदिक संस्कृत की वंशज है। इसे संस्कृत भाषा के अपभ्रंश के तौर पर भी देखा जाता है। ऐसा देखा जाता है कि शुद्ध वैदिक संस्कृत जो पढ़ने में थोड़ी मुश्किल और समझने में और भी अधिक मुश्किल थी, उसे हिंदी में आसान भाषा के तौर पर लोगों के सामने पेश किया।

हमने आपको निचे संस्कृत और हिंदी में आपसी सम्बन्ध के बारे में निचे बताया है।

संस्कृत और हिंदी में आपसी सम्बन्ध

जहां संस्कृत में कठिन शब्दावली का इस्तेमाल किया जाता था, वहीं पर हिंदी में पूरी शब्दों को लगभग एक जैसे उच्चारण के साथ आसान भाषा में परिवर्तित कर दिया गया। जैसे – हस्त को हाथ, तथा हत्था को हाथी, रात्रि को रात, रत्ती को रति, अंगिष्ठिका को अंगीठी, अहम को मैं, त्वम को तुम, सर्व को सभी, किमर्थम को क्यों, अग्नि को आग, समुद्र को समुद्र या सागर, श्वेत को सफेद।

इन सभी शब्दों के उदाहरण से आप समझ सकते हैं कि किस प्रकार संस्कृत भाषा के लगभग सभी शब्दों को हिंदी भाषा में आसानी से उच्चारण किए जा सकने वाले शब्दों के तौर पर परिवर्तित कर दिया गया है। लेकिन लिखने का और बोलने का तरीका तथा शब्दों को पढ़ने का तरीका दोनों का एक जैसा ही है। लेकिन शब्दों का उच्चारण और उन्हें समझने का तरीका पूरी तरह से आसान हो चुका है।

हिंदी पढ़ना क्यों जरूरी है?

आज के समय पूरे विश्व में हिंदी को बोल सकने वाले लोगों की संख्या 100 करोड़ से अधिक हो चुकी है, और 50 करोड़ से अधिक लोग ऐसे हैं जिनकी प्राथमिक भाषा हिंदी भाषा ही है। वे लोग जिनके लिए हिंदी प्राथमिक भाषा नहीं है तथा वह हिंदी को बोल नहीं सकते लेकिन समझ सकते हैं ऐसे लोगों की संख्या पूरे विश्व में 150 करोड़ से अधिक है।

इसलिए हम यह कह सकते हैं कि हिंदी पूरे विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। इसलिए यह आवश्यक है कि हम एक आम हिंदी भाषा जरूर सीखें क्योंकि यह हमारी भाषा है। इसी लिए यह जरूरी है कि हमारी संस्कृति बचाए रखने के लिए हम हिंदी भाषा में वार्तालाप करने के लिए अधिक से अधिक प्रयास करें।

ब्रिटिश साम्राज्य ने भारत पर कई वर्षों तक राज किया था। ऐसा माना जाता है कि भारत और ब्रिटिश साम्राज्य ने 200 वर्षों तक राज किया था। इसी कारण आज के समय हम अंग्रेजी भाषा को इतना महत्व देते हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो आज के समय पूरे भारत में हिंदी समेत अन्य भारतीय भाषाओं को बोलने वाले लोगों की संख्या कई गुना बढ़ चुकी होती, और हिंदी का महत्व भी बढ़ चुका होता। लेकिन इंग्लिश का महत्व इतना नहीं होता, जितना आज के समय लोगों ने बना रखा है।

इसलिए भारत में रहकर काम करने के लिए भारतीयों से वार्तालाप करने के लिए हिंदी एक भाषा है। हालांकि भारत में हर 100 किलोमीटर भाषा बदल जाती है, और हर 10 किलोमीटर पर भाषा को बोलने के तरीके और बात करने के तरीके बदल जाते हैं। भारत में आज के समय तमिल, हिंदी, बंगाली, मगधी, भोजपुरी, मराठी, मैथिली, तेलुगू, तमिल, उर्दू, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, ओरिया, संथाली, पंजाबी, असमी, संस्कृत, तथा और भी ऐसी ही कई भाषाएं बोली जाती हैं, हालांकि यह सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषाओं में से एक है।

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भारत में हिंदी बोलने वाले राज्य कौन से है?

आज के समय भारत में कई ऐसे राज्य है जो यह तो हिंदी बोल सकते हैं, या आसानी से इंग्लिश समझ सकते हैं, जो मूल रूप से हिंदी भाषी राज्य हैं, जिनमें राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश, गोवा, गुजरात, झारखंड, मेघालय, मिजोरम, सिक्किम, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, इन सभी राज्यों में आपको हिंदी बोलने वाले और आसानी से हिंदी समझने वाले लोगों की बहुत बड़ी जनसंख्या मिल सकती है।

भारत के सभी राज्यों में आसानी से रहने के लिए काम करने के लिए तथा आजीविका कमाने के लिए यदि आपको सभी शहरों में रहना भी पड़े तो आप हिंदी भाषा के साथ भारत में आसानी से अपनी आजीविका कमा सकते हैं। यह सभी राज्य के लोग एक दूसरे के राज्य में हिंदी भाषा को इस्तेमाल करते हुए आसानी से रह सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति को हिंदी भाषा बोलने और समझने भी आती है तो भी आसानी से ही सभी राज्यों में रह सकते हैं और व्यापार कर सकते हैं। इसके अलावा सामान्य अंग्रेजी भाषा भारत के सभी राज्यों में व्यवहारिक है।

हिंदी कितने दिनों में सीखी जा सकती है?

यदि आप हिंदी सीखना चाहते हैं तो आपको कम से कम 1 वर्ष का समय अवश्य देना होगा। यदि आप एक छोटे बच्चे को हिंदी भाषा सिखाना चाहते हैं, तो उसे कम से कम 2 से 3 वर्षों का समय हिंदी भाषा को सही से समझने में लगेगा।

एक बच्चा मात्र तीन महीनों में हिंदी बोलना शुरू कर सकता है, लेकिन शब्दों को समझना, उनके अर्थ में भेद करना, यह सभी कार्य एक बच्चे के द्वारा आसानी से नहीं किए जा सकेंगे। एक बच्चा जिसकी उम्र मात्र 6 वर्षीय 7 वर्ष की है उसे हिंदी भाषा सहित सीखने में कम से कम 2 से 3 वर्षों का समय जरूर लगेगा। इसके पश्चात वे हिंदी भाषा और शैली से बोलने और समझने लगेगा।

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बच्चों को हिंदी सिखाने के तरीके – Ways to Teach Hindi to Children

यदि आप बच्चों को हिंदी सिखाना चाहते हैं या आपकी हिंदी भाषा की ओर रुचि है और अपने बच्चों को भी हिंदी भाषा सिखाने में आप दिलचस्पी रखते हैं तो आप आसानी से अपने बच्चों को हिंदी सिखा सकते है।

बच्चों को हिंदी सिखाने के तरीके

लेकिन हिंदी भाषा को सीखने के लिए अन्य किसी भाषा की तरह ही एक पूरी क्रोनोलॉजी होती है। उस क्रोनोलॉजी को मध्य में रखकर ही आप हिंदी भाषा को सीख सकते हैं। नीचे हमने आपको विस्तार से बताया है कि किस प्रकार आप हिंदी भाषा को सीख सकते हैं। आप यह मान सकते हैं कि यह हिंदी भाषा को सीखने के तरीके हैं-

हिंदी भाषा को सीखने के लिए आप कई माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं जैसे कि-

Hindi Seekhne ke tarike
(1) परंपरागत स्कूल के द्वारा(4) गूगल ट्रांसलेट के द्वारा(7) हिंदी भाषा लिख कर और उसे समझ कर
(2) मूवीस देखकर(5) हिंदी धारावाहिक देखकर(8) ऑनलाइन हिंदी कोर्स करके
(3) लोगों से हिंदी में बात करने की कोशिश करके(6) हिंदी भाषा सुनकर(9) अपने दोस्तों से हिंदी में बात
करके
(10) हिन्दी सीखने वाले एप के माध्यम से (Google lean hindi)

इन सभी तरीकों से आप हिंदी भाषा सीख सकते हैं।

इसके अलावा भी किसी भी भाषा को सीखने के कई तरीके होते हैं तथा उन्हीं तरीकों के माध्यम से आप हिंदी भाषा भी सीख सकते हैं। लेकिन जो तरीके हमने आपको बताए हैं उन सभी के माध्यम से आप आसानी से हिंदी भाषा सीखने में समर्थ हो पाएंगे। चलिये अब जानते है की Bacchon ko Hindi padhna kaise sikhayen?

हिन्दू है हम और हिन्दी है हमारी भाषा गर्व करे हर कोई इस पर यही है आशा”।

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Bacchon ko Hindi padhna kaise sikhayen – बच्चों को हिंदी पढ़ना कैसे सिखाएं (Step by Step Process)

यदि आप अपने बच्चों को हिंदी सिखाने में रुचि रखते हैं और वास्तव में ही यह चाहते हैं कि आपकी संतान हिंदी भाषा सीखे, तो आप हमारे द्वारा नीचे बताए गए तरीकों के माध्यम से हिंदी भाषा को पढ़ना सिखा सकते हैं। यह तरीके कुछ इस प्रकार है-

  1. अक्षरों को लिखना सिखाएं।
  2. अक्षरों को पढ़ना सिखाएं।
  3. मात्राएं लिखना सिखाएं और उन्हें पढ़ना सिखाएं।
  4. बारहखड़ी याद कराने की कोशिश करें।
  5. 2 अक्षरों वाले शब्दों से शुरुआत करें।
  6. शब्दों की पहचान कराना शुरू करें।
  7. 3 अक्षरों और उनसे भी बड़े शब्दों की पहचान करना शुरू करें।
  8. वाक्य गढ़ना शुरू करें।
  9. किताब पढ़ने से शुरुआत करें।
  10. सुनकर लिखने की कोशिश करने को कहें।
  11. कविताएं पढ़ने की कोशिश करें और उनका अर्थ समझने की कोशिश करें।
  12. शब्दों के साथ खेलना शुरू करें।

बच्चों को हिंदी पढ़ाने का तरीका-

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#01. अक्षरों को लिखना सिखाएं

आपको अपने बच्चों को सबसे पहले हिंदी भाषा के अक्षरों को लिखना सिखाना होगा। अक्षरों को लिखना सिखाते समय अक्षरों के महत्व को बताना बिल्कुल आवश्यक नहीं है। क्योंकि सबसे पहले अक्षरों को पहचानना आवश्यक है। उनका उच्चारण इसके बाद की बात होती है।

#02. अक्षरों को पढ़ना सिखाएं

यदि आपके बच्चे अक्षर पढ़ना नहीं जानते लेकिन अक्षरों को पहचान सकते हैं, और अक्षरों में भेद बता सकते हैं तो इसके पश्चात बारी आती है कि आपको अपने बच्चों को अक्षरों का उच्चारण समझाना चाहिए। इसके पश्चात आपके बच्चे अगले स्तर के लिए तैयार हो पाएंगे।

#03. मात्राएं लिखना सिखाएं और उन्हें पढ़ना सिखाएं

हिंदी भाषा में मात्राओं का योगदान सबसे ज्यादा होता है। एक छोटी-सी मात्रा हिंदी भाषा में शब्दों का अर्थ पूरी तरह से बदल देती है। इसीलिए यह जरूरी है कि यदि आपके बच्चे अक्षर पढ़ना सीख जाते हैं और अक्षरों में भेज करना सीख जाते हैं। अब अगली बारी है कि आप उन्हें बताएं कि मात्राएँ क्या होती है और किस प्रकार मात्राएं शब्द को बदल देती है, और अक्षरों को उच्चारण के योग्य बनाती है।

#04. बारहखड़ी याद कराने की कोशिश करें।

अब आपको यह कोशिश करनी है कि आपके बच्चे बाहर खड़ी सीखना शुरू कर सके। बारहखड़ी हिंदी अक्षर तथा हिंदी मात्राओं के योग से बने हुए मिश्रित अक्षर होते हैं, जैसे कि: क, का, कि, की, कु, कू, के, कै, कृ, को, कौ, कं, क: । ऐसे ही हिंदी भाषा के सभी वर्णों की एक पूरी मात्र मिश्रित अक्षर का समूह होता है, और उन सभी समूह के समूहों को बारहखड़ी कहा जाता है।

यदि आपके बच्चे बाहर खड़ी याद करना शुरू कर देते हैं उन्हें इसके पश्चात अफसरों के उच्चारण में किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होती है।

#05. शब्दों की पहचान कराना शुरू करें

अक्षर व मिश्रित अक्षर के पश्चात अब बारी आती है कि बच्चे शब्दों की पहचान करना शुरू करें। शब्दों की पहचान के पश्चात यह वाक्यों की पहचान या बड़े शब्दों की पहचान शुरू की जा सकती है। क्योंकि यदि हमें हमारे भाव की अभिव्यक्ति करनी है तो हमें शब्दों के समूह का इस्तेमाल करना होगा, जिसे हम आमतौर पर वाक्य कहते हैं।

शब्दों की पहचान कराना शुरू करें

#06. 2 अक्षरों वाले शब्दों से शुरुआत करें

यदि आपको अक्षरों की पहचान से शुरुआत करनी है तो आपको सबसे पहले छोटे अक्षरों से शुरू करना चाहिए। क्योंकि छोटे अक्षर दिखने में सरल और समझने में आसान लगते हैं, और इसी का फायदा उठाते हुए आपको अपने अक्षरों की बनावट तथा साधारणीकरण के माध्यम से वाक्यों का निर्माण करना शुरू कर देना है।

#07. 3 अक्षरों और उनसे भी बड़े शब्दों की पहचान करना शुरू करें

एक बार छोटे शब्दों की पहचान शुरू हो जाने के पश्चात बीच में ही आपको तीन अक्षर वाले शब्दों की पहचान करना शुरू कर देना है। यह किसी भी भाषा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है कि उनके लगभग मध्यम वर्गीय अक्षरों की पहचान शुरू की जा सके।

#08. वाक्य गढ़ना शुरू करें

एक बार शब्दों की पहचान अपने मध्यम स्तर पर पहुंच जाए तो आप को और अधिक बल देकर बच्चों को अधिक शब्दों की पहचान करवाना जरूरी नहीं है। आपको अब वाक्यों का निर्माण करने की प्रक्रिया भी साथ में ही शुरु कर देनी है। क्योंकि शब्दों का मतलब या शब्दों के उदाहरण कभी भी खत्म नहीं होंगे। नए नए शब्द सदैव बनते रहते हैं। उसी प्रकार शब्दों की पहचान अपने मध्यम स्तर पर पहुंचने के पश्चात बच्चों को स्वयं से वाक्य घटित कर उन्हें लिखने का प्रयास करना शुरू कर देना चाहिए।

#09. किताब पढ़ने से शुरुआत करें

अब यदि बच्चे स्वयं के द्वारा वाक्य निर्मित करना शुरू कर सकते हैं, और निर्मित करने का कार्य आसानी से कर सकते हैं, तो इसके पश्चात उन्हें किताब पढ़ने से शुरुआत करनी चाहिए। यह किताब कोई बड़ी किताब या अच्छे राइटर की होना आवश्यक नहीं है। इसके लिए भी अपने कोर्स की किताब पढ़ना भी शुरू कर सकते हैं।

#10. सुनकर लिखने की कोशिश करने को कहें

यदि किसी भी भाषा को अच्छे से समझना है तो उस व्यक्ति को स्वयं खुद से सुनकर कई वाक्यों को लिखने का प्रयास करना चाहिए। यदि व्यक्ति ऐसा करता है तो वह निश्चित तौर पर ही भाषा को और अधिक अच्छे से समझ पाएगा और शब्दों और वाक्यों में सही ढंग से अंतर कर पाएगा।

#11. कविताएं पढ़ने की कोशिश करें और उनका अर्थ समझने की कोशिश करें

हिंदी भाषा में व्यंग्यात्मक कविताएं अपना मुख्य योगदान देती है। यदि एक व्यक्ति जंग यातना की कविताओं को पढ़कर उनका अर्थ समझ सकता है, तो वह हिंदी भाषा में निपुण होने की ओर आगे बढ़ता है। क्योंकि व्यंग्यात्मक कविताएं मूल रूप से किसी अन्य शब्दों में लिखी जाती है। लेकिन उनके अर्थ किसी अन्य शब्द को या अन्य वाक्यों को संदर्भित करते हैं।

#12. शब्दों के साथ खेलना शुरू करें

अंत में अभ्यर्थी को शब्दों के साथ खेलना शुरू कर देना है, अर्थात नए नए शब्द और वाक्य के निर्माण इन का मजाक उड़ाना चुटकुले बनाना कभी चाय बनाना और मनोरंजनात्मक खेल खेलने का काम व्यक्ति को शुरू कर देना है। यह किसी भी भाषा को सीखने का सबसे अच्छा तरीका होता है।

इस प्रकार आपकी Bacchon ko Hindi padhna kaise sikhayen समस्या हल हो जाएगी और आपके बच्चे आसानी से हिन्दी पढ़ना सीख पाएंगे।

यह भी पढ़ें – मोबाइल फ़ोन को हिंदी में क्या कहते है

हिंदी की क्या आवश्यकता है?

आज के समय हिंदी भाषा भारत में सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषाओं में से एक है।  हम ऐसा मान सकते हैं कि अंग्रेजी और तमिल भाषा के पश्चात हिंदी सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा है। भारत में हिंदी बोलने वाले लोगों की संख्या 60 करोड़ से अधिक है, लेकिन हिंदी को सीखने की केवल यही एक मुख्य कड़ी नहीं है जिसके कारण आपको हिंदी सीखना चाहिए, बल्कि हिंदी को सीखने की और इसकी आवश्यकता को बताने के लिए कई बड़े कारण मौजूद है। जैसे कि, पैसे कमाने के लिए, और व्यापार करने के लिए भारत में हिंदी भाषी लोग आसानी से मिल जाते हैं।

यदि आप भारत में व्यापार करते हैं तो आपके ग्राहकों में लगभग अधिकतर लोगों को हिंदी बोलने और समझने में दिक्कत नहीं होती है। भारत में व्यापार करना कार्य करना, राजनीति करना, लोगों को समझाना, हिंदी भाषा में काफी आसान है। सामान्य तौर पर हिंदी संस्कृत के गर्भ से पैदा हुई है हिंदी भाषा हमारी प्राचीनतम भाषा के जड़ों से जुड़ी हुई है। अर्थात हिंदी भाषा हमारी सांस्कृतिक भाषा भी है। इसीलिए इसे पढ़ना और इसे जानना आवश्यक हो जाता है।

लोगों से बातचीत करने के लिए अपने मन के भावों को व्यक्त करने के लिए हिंदी भाषा एक सर्वथा उचित भाषा है। आप इसका प्रयोग कर सकते हैं।

Bacchon ko Hindi padhna kaise sikhayen से संबंधित FAQ’S

बच्चों को शुद्ध हिंदी लिखना कैसे सिखाएं?

यदि आप बच्चों को शुद्ध हिंदी लिखना सिखाना चाहते हैं तो इसके लिए सबसे पहले ही यह जरूरी है कि आपके बच्चों को साधारण हिंदी आना अनिवार्य है। इसके पश्चात अपने बच्चों को संस्कृत पढ़ना और संस्कृत में लिखना शुरू करवा सकते हैं, क्योंकि यदि किसी व्यक्ति को संस्कृत लिखना और समझना आता है, तो उसे शुद्ध हिंदी लिखना अनिवार्य रूप से समझ में आ सकता है।

शुरुआती लोगों को हिंदी कैसे सिखाएं?

शुरुआती लोगों को हिंदी सीखने के लिए शुरू से शुरू करना चाहिए। अर्थात उन्हें अक्षरों की पहचान से लेकर राज्यों के निर्माण तक की पढ़ाई करनी होगी। यदि कोई ऐसा नहीं कर सकता है तो ऐसे कई तरीके जिनके माध्यम से एक शुरुआती डरती हिंदी सीख सकता है, जैसे कि सुनकर फिल्में देखकर एंटरटेनमेंट वीडियो देखकर, धारावाहिक देखकर, कार्टून देख कर कोई भी व्यक्ति हिंदी सीख सकता है।

कमजोर बच्चों को भाषा कैसे सिखाएं?

यदि कमजोर बच्चों को भाषा सिखा नहीं है तो इसके लिए प्रायोगिक तरीकों की आवश्यकता होगी। इसके लिए बच्चों को पारंपरिक शिक्षा के तरीके से हटकर अर्थात बोर्ड पर लिखकर समझाने के अलावा अन्य कई तरीकों से भाषा को सिखाने का प्रयास करना चाहिए।
जैसे कि, फिल्मों के द्वारा एंटरटेनमेंट वीडियो के द्वारा वार्तालाप के वीडियो दिखाकर कमजोर बच्चों को भाषा सिखाई जा सकती है।

प्राथमिक कक्षा में हिंदी कैसे पढ़ाएं?

प्राथमिक कक्षा में हिंदी पढ़ाने के लिए सबसे पहले बच्चों से हिंदी में बात करना शुरू करना होगा। इसके पश्चात बच्चों को कविताएं सुनाना चाहिए। जिसके पश्चात जब बच्चे आनंद अनुभव कर रहे हो उस समय उन्हें बड़े-बड़े चित्रों के द्वारा किताबों का परिचय देना चाहिए, और निश्चित रूप से बच्चों को स्वयं से हिंदी के वाक्य बनाने का काम देना चाहिए।

यह  भी देखना चाहिए कि वह काम में बच्चे स्वयं से कर रहे हैं या नहीं। इसके पश्चात प्राथमिक कक्षा के बच्चों को हिंदी पढ़ाई जा सकती है।

पढ़ाई में कमजोर से तेज कैसे बने?

इसके कई तरीके हैं जिसके द्वारा पढ़ाई में कमजोर से तेज बना जा सकता है। जैसे कि, लगातार पढ़ने की आदत डालनी होगी, हमेशा कल से बेहतर बनाने की आवश्यकता का अनुभव करना होगा, अर्थात अपनी योग्यता की जांच करनी होगी, जिस विषय में कमजोर हो उसे अधिक महत्व देखकर उसमें भी तेज बनाने का प्रयास करना होगा।
किसी भी विषय को पढ़ने का और समझने का आसान से आसान तरीका अपनाना होगा। यह सब करने के बाद कोई भी बच्चा कमजोर से होशियार बन सकता है।

निष्कर्ष : Bacchon ko Hindi padhna kaise sikhayen

दोस्तों, आज के लेख में हमने आपको बताया कि Bacchon ko Hindi padhna kaise sikhayen। इसके अलावा हमने आपको हिंदी भाषा के बारे में सारी जानकारी देते हुए हिंदी भाषा का महत्व तथा आज के समय इसकी आवश्यकता के बारे में आपको सारी जानकारी दी है।

हम आशा करते हैं कि आज का लेख पढ़ने के पश्चात Bacchon ko Hindi padhna kaise sikhayen, यह जानने के लिए आपको अन्य किसी लेख को पढ़ने की आवश्यकता नहीं होगी। यदि आप कोई सवाल पूछना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं।

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