SAARC ka Mukhyalay kahan hai? क्या आप यह जानना चाहते हैं कि SAARC के headquarters कहां पर है (saarc ka mukhyalay kahan hai), तो हमारे इस article को अंत तक जरूर पढ़ें।

दोस्तों इस article में आपको बताएंगे कि saarc headquarters कहां पर है? यह क्या है? यह establish कब हुआ था? इसके होने की वजह और इसकी कमियां क्या है? saarc member कौन हैं?

तो चलिए शुरू करते हैं।

SAARC क्या है?

SAARC ka Mukhyalay kahan hai

South Asian Association for Regional Cooperation   (SAARC) Dhaka में 8 December 1985 को SAARC Charter की signing के साथ establish हुआ था।

South Asian Association for Regional Cooperation (saarc full form) या SAARC population में दुनिया की सबसे बड़ी organization है। इसमें दुनिया भर की 22% population है। saarc countries में अब Afghanistan, Bangladesh, Bhutan, India, Nepal, the Maldives, Pakistan और Sri Lanka हैं।

South Asia में regional cooperation का idea पहली बार November 1980 में उठाया गया था। Consultation होने के बाद, सात founding countries– Bangladesh, Bhutan, India, Maldives, Nepal, Pakistan, और Sri Lanka थे saarc member country जिन्होंने इसको establish किया। SAARC के foreign secretaries पहली बार Colombo में April 1981 को मिले थे।

2005 में SAARC की 13th annual summit पर Afghanistan इनका सबसे नया member बना था।

South Asia एक बहुत ही जरूरी area है जब बात International peace की आती है। दुनिया की total population में से one fourth लोग इस area में रहते हैं, इस area में natural resources और water resources भी बहुत ज्यादा है इसलिए इसके development की probability भी बहुत ज्यादा है। इसी समय यह area दुनिया में बहुत ज्यादा famous भी है अपनी poorness, unemployment, terrorism और political disturbance की वजह से।

इस regional organization का role इस globalization के समय और भी ज्यादा बढ़ गया है। Nations की interdependence भी बढ़ गई है।

अगर SAARC member एक दूसरे की मदद करेंगे तो poverty और illiteracy आसानी से कम हो सकती है। SAARC members इस example से समझ सकते हैं कि कैसे European Union और ASEAN अपने goals में succeed हो रहे हैं। अब यह बात साफ हो गई है कि economic development तभी होगा जब globalization और regional इस चीज में मदद करेंगे।

SAARC के Headquarters कहां पर है (सार्क का मुख्यालय कहां स्थित है)?

SAARC के Headquarters कहां पर है

South Asian nations ने South Asian Association for Regional Cooperation (SAARC) के 1985 में establish होने के बाद अभी तक 17 summits की हैं। इसकी headquarters Kathmandu, Nepal में है। saarc summit Kathmandu में हुआ था पिछली बार।

South Asian nations के लोगों के लिए इस celebrated meetings का क्या importance है?

इसकी establishment December 1985 को हुई थी, इस बात को तीन decades बीत चुके हैं। अब तक total 17 अलग-अलग agreements और conventions sign किए गए हैं, जिसमें trade के बहुत से aspects cover किए गए हैं, development और social welfare के भी।

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एक इंसान यह सोच रहा होगा कि इन talks और agreements के consequences क्या होंगे? लेकिन इनके implementations बहुत ही ज्यादा खराब रहे हैं, जब इनकी तुलना दूसरी similar regional associations जो Africa, East Asia, Latin America और North America में है।

इस under- performance का सवाल इस debate की ओर ले जाता है कि SAARC का future में क्या होगा, और यह सवाल scholarly attention भी warrant करता है क्योंकि SAARC का पिछला summit Kathmandu में था।

SAARC ने Cooperation का Context बदला है

यहां पर खुश होने की एक बात यह है की, इस particular juncture में SAARC के future के बारे में भी बात होगी। इससे हमें यह आशा तो रख सकते हैं कि इस summit की वजह से global और regional political economies में बहुत बदलाव आएंगे जैसे कि India और China का economic powers के तौर पर बढ़ना, SAARC states के बीच में social और environmental connectivity की appreciation बढ़ेगी, Afghanistan में से Western मिलते वापस जाएगी, और Narendra Modi का India के नए Prime Minister के तौर पर elect होना जो ज्यादा regionally-oriented लगते हैं उनके predecessors से।

जो सवाल बहुत ज्यादा interesting है वह यह है कि यह profound contextual opportunities और challenges किस हद तक discussion table पर आएंगी। क्योंकि जो बात SAARC को ज्यादा effective बनाती है वह यही हैं। यह एक बहुत ज्यादा जरूरी सवाल है ना केवल regional security और development के viewpoint से बल्कि global peace और stability के लिए भी।

SAARC के लिए Challenges – पुराने और नए

SAARC के लिए Challenges

अभी तक, SAARC में भारत के सबसे बड़े और सबसे ज्यादा powerful member होने के बावजूद, India ने बहुत ही कम इंटरेस्ट दिखाया है regional association में बाकी smaller states के enthusiasm के मुकाबले।

India के hesitation का एक कारण यह भी है, की India के perspective से SAARC एक बहुत ही ज्यादा अच्छी opportunity दे रहा है smaller states को जिन्होंने SAARC का इस्तेमाल India के खिलाफ gang up करने के लिए किया है और China के साथ play करने के लिए।

लेकिन इस बात को भी ध्यान में रखना चाहिए कि छोटे लेकिन sovereign states आपस में काम करने से ज्यादा बेनिफिट कमाते हैं, जिससे India को यह opportunity मिल जाती है कि वह well-functioning regional association पर leadership कर सके।

इतमें जरूरी बात यह है कि SAARC कैसे और किस extent तक mechanism बनाए, जिससे कि वह अपने unequal members के बीच में collaboration बढ़ा सके, यह भी हो सकता है कि वह rules दे जिससे कि effective negotiation हो सके और जो unequal member states की divergent expectations और interests को suit करे।

यह बात तो हर किसी को पता है कि member states की long-standing bilateral disputes बहुत से diverse topics पर जिनमें से एक Kashmir है भारत और पाकिस्तान को लेकर, जो सबसे ज्यादा परेशान करने वाला है।

जो inter-state dispute है वह बहुत ही ज्यादा critical हो चुके हैं पिछले कुछ सालों में, indo-pak relations बहुत ही ज्यादा खराब हो चुके हैं एक SAARC delegate एक देश से उड़ता है जिससे कि वह उस region में आ सके जहां पर summit हो रहा है।

South Asia एक ऐसा region है जहां पर extreme cultural diversity है, 100 से भी ज्यादा languages और cultural diversity हैं। SAARC regional integration का process कैसे शुरू कर सकता है जब nation-states democratic representation ही achieve नहीं कर पा रहे वह भी आपस में ही?

जिस तरह से Wars और conflicts जो चलते आ रहे हैं उससे यह पता चलता है कि nation-states ही state authority की legitimacy को society में enhance नहीं कर पा रहे हैं। Internal representational crisis के अंदर, बहुत सी SAARC countries को federal autonomy से pressure पड़ रहा है power के future decentralization के लिए, और secessionism के लिए भी।

Current federalisation debate Nepal में चल रही है जिसका debate point decade long civil War और जो tensions चल रही है भारत के North East और पाकिस्तान के Sindh और Balochistan के बीच में वह इस challenge के examples हैं। तो जब तक यह issues खतम नहीं होते SAARC का काम बहुत ज्यादा कठिन होता जाएगा।

SAARC के Principles

SAARC के cooperation का framework इन points पर based है:

Sovereign equality, territorial integrity, political independence, non-interference जैसे principles का आदर करना जो दूसरे states के internal affairs में हो जिससे उनका mutual benefit हो।

ऐसे corporation को bilateral और multilateral cooperation से substitute नहीं किया जाना चाहिए लेकिन complement होना चाहिए।

SAARC के Objectives

SAARC के Objectives

South Asia के लोगों का welfare promote करना और उनकी जिंदगी की quality को improve करना। 

Economic growth को accelerate करना, और cultural development करना region में और सारे individuals को opportunity देना, जिससे वह dignity के साथ रह सके और अपने पूरे potential को पहचान सके।

Collective self reliance को promote करना और strengthen करना South Asia की countries में।

Mutual trust में contribute करना, और दूसरे की problems को समझना और appreciate करना।

Active collaboration और mutual assistance promote करना economic, social, cultural, technical और scientific fields में।

दूसरी developing countries के साथ cooperation strengthen करना और आपस में cooperation बढ़ाना international forums पर जिन matters में उनके interests हों।

SAARC की Importance

SAARC में दुनिया का 3% area, दुनिया की population का 21% आता है और global economy का 3.8%  (US$2.9 trillion) आता है।

Synergies बनाना: यह दुनिया का सबसे ज्यादा populated region है और सबसे ज्यादा fertile areas में से एक भी। SAARC countries के पास common tradition, dress, food और culture और political aspects हैं इसकी वजह से उनके actions synergize करते हैं।

Common solutions: सारी SAARC countries की problems और issues समान हैं जैसे कि poverty, illiteracy, malnutrition, natural disasters, internal conflicts, industrial और technological backwardness, low GDP और poor socio-economic condition और अपने living standards को uplift करना इसलिए इनके solutions भी वही हैं।

जैसा कि हमने आपको बताया कि saarc country list में Afghanistan, Bangladesh, Bhutan, India, Nepal, the Maldives, Pakistan और Sri Lanka है।

SAARC की Achievements

SAARC की Achievements

Free Trade Area (FTA): SAARC comparatively एक नई organization है global arena में। इन countries के members ने एक Free Trade Area (FTA) establish किया है जिससे उनका internal trade increase हो और कुछ states का trade gap घटे।

SAFTA: एक Trade Agreement goods को confined है information technology की तरह। यह agreement sign हुआ था जिससे सारे goods की custom duties को घटा कर 0 कर दिया गया 2016 तक।

SAPTA: South Asia Preferential Trading Agreement, member countries के बीच में trade बढ़ाने के लिए जो 1995 में आया था।

SAARC Agreement Trade In Services (SATIS): SATIS GATS-plus ‘positive list' approach को follow कर रहा है services liberalization में trade करने के लिए।

SAARC University: एक SAARC University establish करना India में, एक food bank और एक energy reserve Pakistan में।

SAARC की कमियां

इनकी meetings की frequency कम हैं। इनके cooperation का area बहुत ज्यादा बड़ा है जिसकी वजह energy और resources का diversion हो जाता है। India और Pakistan के बीच conflict की वजह से SAARC के prospects बहुत ज्यादा hamper हुए हैं।

ये भी पढ़े…

Conclusion about SAARC ka Mukhyalay kahan hai

दोस्तों इस article में हमने आपको बताया कि SAARC के headquarters कहां हैं और इसके बारे में पूरी जानकारी भी दी। saarc upsc में भी कई बार आ जाता है।

ऐसे समय पर जहां पर regionalism बहुत बड़ा agenda बनके emerge हुआ है global politics और economy में, South Asia SAARC से retreat नहीं कर सकती, चाहें उनकी performance पिछले समय में खराब ही क्यों ना रही हो। 

अगर SAARC ऐसे तरीके ढूंढ पाए जिससे वह bilateral disputes के ऊपर बातों को पर ज्यादा ध्यान ना दें जैसा कि उन्होंने पहले समय में किया है, और common regional interests के agenda पर ज्यादा focus करें, तो SAARC आसानी से bilateral stumbling blocks को ease out करने में मदद कर सकता है।

इस article में हमने आपको saarc ka mukhyalay kahan hai answer या saarc ka mukhyalay kahan sthit hai भी दिया है कि SAARC के headquarters Kathmandu, Nepal में है।

SAARC को दूसरों को देखकर भी सीखना चाहिए कि दूसरी associations क्या कर रही हैं, और फिर trade के लिए inter-regional cooperation करने की कोशिश करनी चाहिए।
आशा करते हैं आपको हमारा यह article SAARC ka Mukhyalay kahan hai पसंद आया होगा। अगर आपका कोई सवाल है तो हमसे comment करके जरूर पूछें। धन्यवाद!

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