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ALU Full Form in Hindi? क्या आप यह जानना चाहते हैं कि ALU क्या है, ALU की पूरी जानकारी चाहते है, तो हमारे इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़िएगा, क्योंकि इस आर्टिकल में हम आपको ए. एल. यू. से जुड़ी हुई सारी जानकारी देंगे। 

दोस्तों आपको तो पता ही होगा कि कंप्यूटर के कई parts होते हैं जिसमें से एक पार्ट कंप्यूटर के दिमाग की तरह काम करता है। और उस पार्ट को ही एल यू कहा जाता है, आज हम आपको उसी पार्ट के बारे में हिंदी में बताने वाले हैं।

ALU Full Form in Hindi

कंप्यूटर क्या होता है, यह तो आप सभी को मालूम ही होगा, इसी में एक भाग होता है, जिसे हम ALU कहते हैं। चलिए हम आपको सबसे पहले ALU के फुल फॉर्म के बारे में बताते हैं।

ALU का फुल फॉर्म क्या होता हैै? (ALU full form in computer)

ALU का फुल फॉर्म Arithmetic And Logical Unit होता है। इसे हिंदी में अर्थमैटिक  लॉजिकल यूनिट कहाँ जाता है। इसका हिंदी में अर्थ अंकगणित और तार्किक इकाई होता है। 

अब अगर आपसे कोई यह सवाल पूछे कि what is the full form of ALU, तो आप आसानी से इसका जवाब दे सकते हैं।

अब जबकि आपको अपने सवाल का जवाब मिल गया है कि full form of alu in computer क्या होता है, हम आपको यह बताते हैं कि यह क्या होता है और कैसे काम करता है।

ALU क्या है?

अर्थमैटिक एंड लॉजिकल यूनिट, सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट यानी कि CPU के ब्लॉक के अंदर एक डिजिटल सर्किट की तरह होता है, जिसका काम एक कंप्यूटर में अरिथमेटिक processing करने का होता है। 

इसके अंदर एक डिजिटल सर्किट होता है, जिसका इस्तेमाल अंकगणित और अतार्किक प्रोसेस को करने में किया जाता है। यह एक कंप्यूटर का पार्ट होता है, जो सीपीयू के ब्लॉक के अंदर ही स्थित होता है। 

इस नए जमाने में CPU के अंदर बहुत ज्यादा ताकतवर ऐ. एल. यू. आने लगे हैं। आज लगभग हर कंप्यूटर के सीपीयू में ऐ. एल. यू. के अलावा भी एक सीयू यानी कि नियंत्रण इकाई आती है। 

ALU सी. पी. यू. का वह भाग होता है जो कंप्यूटर के हर अर्थमेटिक ऑपरेशन को पूरा करता है। 

आपको मालूम ही होगा कि, CPU एक कंप्यूटर के अंदर के सारे सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर को मैनेज करता है, और एएलयू इस काम में सीपीयू की मदद करता है। 

CPU में तीन जरूरी यूनिट होती है।

  • ALU (Arithmetic Control Unit), जोकि एक ऐसा module होता है जो सारी कैलकुलेशंस को हैंडल करता है।
  • CU (Control Unit), यह एक ऐसा मॉड्यूल होता है, जो यह देखता है कि resources आपस में किस तरह से communicate कर रहे हैं।
  • MU (Memory Unit), यह मॉड्यूल जरूरत के समय हाल की हाल मेमोरी प्रोवाइड करता है और साथ ही में सिस्टम में जो external मेमोरी के डिवाइस जुड़े हुए हैं, उनको मैनेज भी करता है। 

एलयू इस सेटअप के दिमाग की तरह काम करता है, क्योंकि CU और MU एलयु को कमांड करते हैं, और डाटा को स्टोर और मूव करते हैं, जहां पर कैलकुलेशंस और बाकी के ऑपरेशन होते हैं।

ALU किन चीजों से बना होता है? | ALU की पूरी जानकारी

ALU में combinatorial सर्किट होते हैं और यह बेसिक काम करता है जैसे कि जोड़ना, घटाना और bitwise करना जो एक ऐसा एक्शन होता है “जिसे सीधे सीपीयू सपोर्ट करता है” और एक कंबिनेटरियल सर्किट का मतलब वह सर्किट होता है, जिसे एक से ज्यादा कंपोनेंट्स को मिलाकर बनाया जाता है। 

एलयू मल्टीप्लिकेशन के sums नहीं कर सकते हैं, क्योंकि combinatorial सर्किट की मदद से गुणा करना नामुमकिन होता है।

ALU एक बहुत ही ज्यादा कठिन चिपसेट होता है जो कुछ इनपुट्स और सिलेक्शंस लेता है, और डाटा की मदद से एक ऑपरेशन करता है और इसका जवाब आउटपुट के तौर पर देता है। 

सिस्टम में जिस तरह की जरूरत होती है, एलयू का सर्किट उसी तरह के ऑपरेशन करता है। ज्यादातर, एक कंप्यूटर का एलयू बहुत से ऑपरेशंस को सपोर्ट करता है, जैसे कि सामान्य मैथ्स के ऑपरेशन से लेकर कठिन लॉजिकल और रिलेशनल फंक्शंस करना।

ALU कैसे काम करता है?

एलयू बुनियादी अर्थमैटिक और लॉजिकल प्रॉब्लम्स को हल करता है। अर्थमैटिक ऑपरेशंस जैसे कि – घटाव, गुणा और विभाजित करना आदि, लॉजिक वाले काम जैसे कि मान, और, OR जैसी वैल्यूज के operations करना।

कंप्यूटर में हर जानकारी को बायनरी की गिनती में store किया जाता है, जिसका मतलब यह है कि यह गिनती केवल 0 और 1 में ही लिखी जाती है। 

इसमें transistor switch का इस्तेमाल संख्याओं का आकलन करने के लिए किया जाता है, क्योंकि एक स्विच में केवल दो ही संभावित रास्ते होते हैं, जिन्हें open या close कहा जाता है। 

सबसे पहले ओपन ट्रांजिस्टर होता है, जिसमें कोई भी करंट flow नहीं करता है और यह 0 को रिप्रेजेंट करता है। दूसरा आता है क्लोज ट्रांजिस्टर, जिसमें करंट बहता है और यह 1 को रिप्रेजेंट करता है। 

इसमें कई transistors को जोड़कर भी ऑपरेशन को पूरा किया जाता है और एक ट्रांजिस्टर का इस्तेमाल दूसरे को कंट्रोल करने के लिए भी किया जा सकता है।

असलियत में, दूसरे ट्रांजिस्टर्स को लगाने के आधार पर ट्रांजिस्टर स्विच को चालू या फिर बंद करना पड़ता है। इसे एक गेट के रूप में दिखाया जाता है, क्योंकि व्यवस्था का इस्तेमाल करंट को flow कराने में या फिर उसे रोकने के लिए किया जाता है। 

इसमें जो सबसे ज्यादा आसान ऑपरेशन होता है वह NOT गेट होता है। इसमें एक ही ट्रांजिस्टर का इस्तेमाल किया जाता है और इसमें केवल एक ही इनपुट और एक ही आउटपुट होता है।

ALU में ज्यादातर यह operations होते हैं।

जोड़: A और B मिले हुए हैं और योग Y और layout पर आता है। 

कैरी के साथ जोड़ना: A,B और कैरी को जोड़कर और योग Y और कैरी-आउट आता है।

घटाना: B और A, या फिर इसके विपरीत को घटाया जाता है और अंतर Y को लेआउट पर लाया जाता है। 

इस फंक्शन को करने के लिए, कैरी-आउट करने की कुशलता के लिए एक उधार संकेत होता है। इस ऑपरेशन का इस्तेमाल A और B के परिमाण के विपरीत भी किया जा सकता है। 

ऐसी स्थिति में, Y आउटपुट, पर processor का भी ध्यान नहीं दिया जा सकता है, जो केवल विशेष स्थिति के bits में शामिल होते हैं, जो हमें ऑपरेशन से मिलते हैं।

उधार के संग घटाना: B को उधार मतलब की कैरी इन के साथ B को घटाया जा सकता है, यह इसके विपरीत भी किया जा सकता है और इसका अंतर Y और कैरी- आउट पर आता है।

नकारात्मक (दो के पूरक): A (या B) को शून्य से घटाया जाता है और अंतर Y निकलता है।

Growth: A (या B) में एक ग्रोथ होती है और परिणाम मान Y निकलता है।

घटाव: A (या B) में से एक को घटाया जाता है और परिणाम मान Y निकलता है.

पास से गुजरें: A (या B) के सभी bits Y unchanged दिखाई देते हैं। इस ऑपरेशन का इस्तेमाल आमतौर पर operand के पत्राचार की स्थिति का पता लगाने के लिए किया जाता है या यह शून्य या negative है या ऑपरेंड को processor रजिस्टर में डालना है।

ALU के डिजाइन कैसे होते हैं?

ALU डिजाइन ट्रांसिस्टर पर निर्भर करता है। ट्रांजिस्टर के ऑन या ऑफ होने से कंप्यूटर की स्क्रीन पर True या False दिखाया जाता है। सभी ट्रांजिस्टर आपस में कनेक्टेड रहते हैं। इसमें कुल छह गेट होते हैं।

1. OR GATE:  OR गेट के दो transistors होते हैं जो parallel कनेक्टेड होते हैं। इसमें A और B दो इनपुट होते हैं, जो अलग-अलग ट्रांसिस्टर्स पर दिए गए होते हैं। 

दोनों ट्रांसिस्टर को collector आपस में कनेक्ट करता है। अगर किसी एक कलेक्टर पर true लिखकर आता है तब आउटपुट भी true मिलता है, यही OR गेट का लॉजिक होता है।

2. AND GATE: एंड गेट में दो ट्रांजिस्टर को सीरियल में जोड़कर बनाया जाता है। जब इनपुट A true होता है, तब ट्रांसिस्टर A ऑन हो जाता है और जब ट्रांजिस्टर B के emitter पर बहुत ज्यादा वोल्टेज, मतलब कि true मिलता है और वह true आउटपुट देता है। 

अगर किसी एक ट्रांजिस्टर पर फॉल्स मिलता है, तो फिर उससे जुड़ा हुआ ट्रांसिस्टर भी आपको ऑफ मिलेगा और आपका आउटपुट फॉल्स आ जाएगा।

3.NOT GATE: NOT गेट में केवल एक ही ट्रांजिस्टर से डिजाइन किया जा सकता है। NOT गेट के लिए आउटपुट कलेक्टर से नहीं एमिटर से लिया जाता है।

4. ADDER: इसमें ट्रांजिस्टर से एडर का डिजाइन निकलता है, इसी वजह से एडर को ALU में हमेशा लॉजिक गेट की मदद से बनाया जाता है। 

5. SUM: एडर में SUM या फिर आउटपुट NOR गेट की तरह ही होता है। इसी वजह से SUM सर्किट या डिजाइन SUM गेट और NOR गेट के पैरलल में कनेक्टेड रहता है। 

और कैरी आउटपुट और AND गेट के पैटर्न को फॉलो करता है। इसलिए कैरी सर्किट AND गेट के हिसाब से डिजाइन किया जाता है।

6. OR GATE: OR गेट के डिफरेंस X-OR गेट के पैटर्न को फॉलो करता है और borrow आउटपुट के लिए किसी एक इनपुट को invert करके दूसरे इनपुट के साथ AND गेट में भेजा जाता है। 

इस तरह से हम अलग-अलग बेसिक लॉजिक गेट से कठिन ऑपरेशन के सर्किट को डिजाइन कर सकते हैं। एलयू में इसी तरह से कई सर्किट डिजाइन होते हैं, जो अर्थमैटिक और लॉजिकल ऑपरेशंस का हल निकालते हैं।

ALU का proposal किसने दिया था? 

ALU का प्रपोजल सबसे पहले सन 1945 में “गतितिज्ञ जॉन वॉन न्यूमैन” ने दिया था।

ALU को कंप्यूटर में सबसे पहले किस वर्ष में implement किया गया था?

ALU को सबसे पहले 1967 में इंप्लीमेंट किया गया था।

ALU को कंप्यूटर में सबसे पहले किसने implement किया था?

एलयू को सबसे पहले कंप्यूटर में फेयरचाइल्ड ने इंप्लीमेंट किया था।

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निष्कर्ष About ALU Full Form in Hindi

दोस्तों हमारे इस आर्टिकल की मदद से हमने आपको बताया कि कंप्यूटर के सीपीयू के अंदर एक बहुत ही ज्यादा जरूरी भाग होता है जिसे हम ऐ.एल.यू. कहते हैं। हमने आपको बताया कि ALU ka full form क्या होता है।

जो लोग कंप्यूटर के बारे में थोड़ी बहुत भी जानकारी रखते हैं, उन्हें यह पता होता है कि आखिर इस पार्ट की कंप्यूटर में क्या अहमियत होती है और यह किस तरह से काम करता है।

आशा करते हैं कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा, इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें जो इस टॉपिक के बारे में जानकारी पाना चाहते हैं। 
हमारे इस आर्टिकल को अंत तक पढ़ने के लिए धन्यवाद!

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